शेर और लोमड़ी कि कहानी:-
एक बार कि बात है जब एक शेर जंगल का राजा था! जंगल में बहुत प्रजाति के जानवर रहते थे! जिनमे अनेक प्रकार के जानवर थे जैसे कि लोमड़ी, खरगोश, कछुआ, कुत्ता, हाथी जैसे अनेक जानवर थे! अब शेर जंगल का राजा था तो वह इन जानवरों का सिकार करके इन्हें खा जाता था!
फ़िर क्या, जंगल के राजा ने एक दिन बैठक बुलाई जिसमें सभी जानवर मौजूद थे! साथ ही पंछी भी मौजूद थे! अब राजा शेर ने कहा,"कि में शिकार करने नहीं आऊंगा!" आप को स्वयं एक दिन एक जानवर आते जाना है! सब पंछी ने कह दिया जैसी मर्जी राजा कि !
फ़िर क्या, सभी ने एक एक दिन करके जाना शुरू कर दिया! एक दिन खरगोश गया, दूसरे दिन कछुआ गया, तीसरे दिन बिल्ली गई, चौथे दिन कुत्ता चला गया, धीरे-धीरे सब चले गए! अब बारी आती हैं लोमड़ी की ज्योकी की एक चालाक प्रजाती का जानवर है! वह कापते कापते गई ! उसके पास बचने के लिए एक उपाय था! उसने जाकर राजा शेर से कहा कि एक और शेर है जो कहता है कि में जंगल का राजा हूं!
फ़िर क्या, राजा शेर ये सुनते ही बोला कहा है वो शेर मुझे उसके पास ले चलो! लोमड़ी बोली वो याही पास के एक कुए में रहता है! शेर घुस्से से भेयभित होकर लोमड़ी के साथ निकल पड़ा ! बोला बताओ कहा है वो कुआं!
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| शेर और लोमड़ी |
फ़िर क्या, वे कुएं के पास पहुंच गए ! जिसमे राजा शेर को
उसी कि परछाई दिखाई देती जैसे अंदर कोई शेर हो! लेकिन ये सब लोमड़ी का ही किया धरा है! शेर कहता कि जंगल का राजा मे हूं! उसे उसकी परछाई दिखाई देती और वही आवाज़ दोबारा गूंजती! जिससे उसे लगा कि सच मुच कोई शेर अंदर हो! और वो उससे लड़ने के लिए छलांग लगा देता है! फ़िर देखता है कि उसमें तो कोई शेर ही नहीं है! और लोमड़ी ये देखकर खुश हों जाती हैं! और शेर को कहती हैं, ए मूर्ख जानवर तू मुझे खाना चाहता था ना ले अब खा कैसे खाता है! बेचारा शेर कुएं से बाहर नहीं निकल पाया! और वही दम तोड़ देता हैं!
फ़िर क्या, लोमड़ी खुश हो गई! और बोली चलो जान बचीी!
सारांश:-
हमें इस कहानी से बहुत कुछ सीखने को मिलता है! जैसे कि हमें किसी ऐसे चतुर इंसान के साथ नहीं रहना चाहिए जोकि उसके बदले हमें मरवा दे! एक और कि आगर आपके प्राण जोखिम में पड़े हों तो ऐसी चालाकी करना भी आवशयक है! आशा करता हूं कि आपको यहां कहानी बहुत पसंद आए होंगी!
(चतुर लोमड़ी और मूर्ख शेर कहानी)



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