खरगोश और कछुए कि कहानी:-
एक बार की बात है एक जंगल में रेस प्रतियोगिता रखी थी!अब जंगल में खरगोश बहुत तेज भागने वाले जानवरों उसमें से एक था उसे अपने दौड़ पर काफी घमंड था! वह सोचता था कि मुझसे तेज और कोई नहीं दौड़ता! उसे लगता था कि वही सबसे तेज दौड़ने वालों में से एक हैं!
अब प्रतियोगिता में कछुए और खरगोश ने भाग लिया! प्रतियोगिता कुछ समय में शुरू कर दी! खरगोश तेजी से भाग कर थोड़ी आगे निकल गया! पीछे पीछे कछुआ अपनी धीमी चाल से चलता हुआ आ रहा था! कछुआ 2 घंटे में जो चलता वो खरगोश 5 मिनट में दौड़ लेता था! खरगोश कछुए से बहुत आगे निकल गया!
और सोचने लगा कि कछुआ अभी बहुत दूर है! उसे आने में बहुत टाइम लग जाएगा! मैं तो उससे बहुत तेज दौड़ता हूं! वह पर बैठकर सोचने लगा कि कछुआ आए जब तक क्या किया जाए! उसके मन में एक सुझाव आया कि जब तक कछुआ आए तब तक क्यों ना सो लिया जाए! फिर वह कछुए के इंतजार में सो जाता है! उसे बहुत तेजी से नींद आ जाती है!!
फिर कछुआ धीरे धीरे धीरे धीरे उससे भी आगे निकल जाता है! खरगोश की नींद नहीं खुल पाती है! और वह सोता ही रहता है! फ़िर कछुआ खरगोश से बहुत दूर बहुत निकल जाता है फिर खरगोश की नींद खुलती हैं!
खरगोश फिर दौड़ कर जाता है और वहां देखता की कछुए को प्रथम स्थान प्राप्त करने पर सब उसका सम्मान कर रहे हैं! उसे पुरुस्कार दे रहे हैं! खरगोश ये सब देखकर दंग रह जाता है!
इसीलिए कहा जाता है कि हमें स्वयं पर घमंड नहीं करना चाहिए! दुनिया में हमसे तेज़ भी लोग हैं! इसलिए हमें घमंड नहीं करना चाहिए!
आशा करता हूं कि आपको इस कहानी से बहुत कुछ सीखने को मिला होगा! घमंड एक नस्वर हथियार है! जिससे हम नहीं बल्कि हमारा जीवन भी खतम हो सकता है!





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