इस चूहे की कहानी सुन कर आप भी सोच में पढ़ जाएंगे | chuhe ki kahani | short story in hindi

 इस चूहे की कहानी सुन कर आप भी सोच में पढ़ जाएंगे | chuhe ki kahani | short story in hindi | डोलू चूहे की कहानी

 
इस चूहे की कहानी सुन कर आप भी सोच में पढ़ जाएंगे | chuhe ki kahani | short story in hindi


















 

डोलू चूहा बहुत उदास था। वह सामने वाले गुलाबी घर को बहुत ही प्यार से निहार रहा था। दरअसल वह उस घर में रहना चाहता था पर उस घर का मालिक रोज़ उसे पिंजरे में बंद करने में सफल हो जाता और फिर उसे सामने वाले मैदान में छोड़ देता था। डोलू को वह घर बहुत पसंद था क्योंकि वहां रोज़ तरह-तरह की मिठाइयां आती रहती थीं। वहां रहकर डोलू काफ़ी मोटा भी हो गया था। इतनी मिठाइयां पिंजरे से बाहर रखी रहती थीं, पर ना जाने क्यों वह घी चुपड़ी रोटी के लालच में रोज़ पिंजरे में फंस जाता था। उसने कई बार सोच लिया कि वह पिंजरे में नहीं जाएगा लेकिन कभी-कभी मीठा खाकर बोर हो जाता था इसलिए रोटी खाने का मन होता था। फिर उसे पता था कि पिंजरे में फंस भी गया तो मालिक सामने वाले मैदान में ही छोड़ेगा। इसीलिए वह बेझिझक रोटी खाता था लेकिन इस बार गज़ब ही हो गया। अक्सर उस घर का मालिक उसे पिंजरे में क़ैद होते ही तुरंत बाहर छोड़ देता था और वह भी नज़र बचाकर तुरंत घर में घुस जाता था लेकिन इस बार पिंजरे के मालिक ने उसके साथ बहुत बुरा व्यवहार किया। वह शाम को पिंजरे में बंद हुआ था लेकिन मालिक उसे छोड़ने बाहर नहीं आया। वह दो दिन तक पिंजरे में परेशान होता रहा। अब उसे पता चला कि क़ैद क्या होती है। उसने सोच लिया था कि वह कभी भी उस गुलाबी घर में नहीं जाएगा लेकिन अब वह कहां जाएगा, यही सोचकर वह इधर-उधर सबकी नज़र बचाते हुए घूम रहा था। अब सबकी नज़रों से बचना थोड़ा मुश्किल था, वह काफ़ी मोटा जो हो गया था। उसे डर था कि कहीं कॉलोनी के बच्चों ने देख लिया तो उसे दौड़ा-दौड़ाकर उसकी हालत ख़राब कर देंगे। तभी उसे अपने दोस्त मोलू की याद आई। अरे हां...यहां लाल टाइल्स वाले घर में ही तो रहता है मोलू। यही सोचकर डोलू लाल टाइल्स वाले घर की ओर बढ़ गया। एक खिड़की हल्की-सी खुली देखकर वह झटपट घर में घुस गया। वह एक पलंग के नीचे जाकर छिप गया था। वहां भी उसने एक पिंजरा पड़ा देखा। उसे बड़ा आश्चर्य हुआ कि मोलू तो इस पिंजरे की गिरफ़्त में नहीं आता। चुपड़ी रोटी की ख़ुशबू से एक बार फिर वह बेचैन हो गया था पर उसने सोच लिया था कि पहले वह मोलू से मुलाक़ात करेगा। उसे ज़्यादा इंतज़ार नहीं करना पड़ा... वहीं रखी हुई अलमारी के पीछे से मोलू निकला। डोलू की किट-किट आवाज़ को उसने तुरंत पहचान लिया और उसके पास आ गया। मोलू ने डोलू से कहा- ‘अरे वाह दोस्त......तुम्हें यहां देखकर बहुत अच्छा लगा। बोलो क्या खाओगे?’ डोलू हंसते हुए बोला- ‘तुम तो ऐसे पूछ रहे हो जैसे घर तुम्हारा ही हो।’ मोलू ने कहा- ‘दोस्त! सब चीज़ों की थोड़ी-थोड़ी वैरायटी मैंने एक कोने में रख रखी है। जब जो खाना होता है, खा लेता हूं।’ फिर अचानक उसकी नज़र पिंजरे की तरफ़ पड़ी। उसने डोलू से कह- ‘दोस्त तुम यहां आ गए हो पर इस पिंजरे से बचकर रहना। मैं इसमें भूलकर भी नहीं जाता।’ डोलू ने सारी बात मोलू को बताई कि कैसे वह पिंजरे में फंसा। यह सुनकर मोलू ख़ूब खिलखिलाकर हंसा। उसने कहा- ‘अगर यहां तुम पिंजरे की रोटी के लालच में पड़े तो फिर तुम इस इलाके में ही नज़र नहीं आओगे क्योंकि इस पिंजरे में क़ैद होने के बाद इस घर का मालिक अपनी गाड़ी में पिंजरा रखकर तुम्हें बहुत दूर छोड़ आएगा।’ यह सुनकर डोलू सहम गया। उसने वादा किया कि वह पिंजरे की तरफ़ देखेगा भी नहीं। अब दोनों चूहे मज़े से खाना खा रहे थे। सचमुच मोलू ने बहुत सारी चीज़ें जमा कर रखी थीं। धीरे-धीरे डोलू को भी आदत हो गई कि पिंजरे से किस तरह दूर रहना है। कुछ दिन रहने के बाद डोलू ने कहा- ‘दोस्त! अब मैं फिर से अपने गुलाबी घर में जाता हूं। अब मुझे पिंजरे से दूर रहना आ गया है।’ मोलू ने मुस्कराते हुए कहा- ‘ठीक है दोस्त... तुम्हारे साथ अच्छा लगा। फिर मिलना।’ डोलू ने भी उसे अपने घर आने के लिए कहा। मोलू ने हाथ हिलाकर अपने दोस्त डोलू को विदा किया। डोलू फिर से गुलाबी घर में आकर बहुत ख़ुश था क्योंकि उसके दोस्त मोलू ने उसे पिंजरे से दूर रहना सिखा दिया था।


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