एक सच्ची भूतिया कहानी (भानगढ़ का किला):-
एक भूतिया कहानी! यह कहानी एक सच्ची घटना पर आधारित हैं! भूत प्रेत कि कहानीया सुनने और पढ़ने में तो बहुत रोमांचक लगती हैं लेकिन जरा सोचिए वास्तव मे ऐसी घटना आपके साथ हो तो क्या आप रोमांचक कहेंगे! किसी भूत प्रेत आत्मा का आसपास होने का भय भी शरीर में एक अजब सी सिरंन पैदा कर देता है! तो ऐसे में जाहिर सी बात है कि रोमांचक कहने वाले कि तो रूह भी काप जाएगी!
वैसे तो कहने को बहुत सी Haunted जगह है कि जहां आत्माओं का वास होता! परन्तमें उनमें से एक राजस्थान का भानगढ़ किला है! यहां भी कुछ ऐसा ही है! जैसे बताया जाता है! कि यहां भी कुछ आत्माओं का वास है! यह पर भी कोई रात के समय वहां नहीं ठहरता! इस जगह जो भी लोग घूमने जाते हैं! वे सूरज डूबने से पहले ही वहां से बाहर निकल आ जाते हैं! इस जगह पर रात के समय पर जाने के लिए सरकार ने भी रोक लगा!
इस स्थान को वैज्ञानिक भी सामान्य स्थान नहीं मानते हैं
तभी तो राज्य सरकार द्वारा भानगढ़ किले के चारों तरफ चेतावनी के तौर पर बोर्ड लगा हुआ है
जिसमें साफ-साफ लिखा है कि सूर्योदय होने से पहले और सूर्यास्त के बाद कोई भी इस किले पर नहीं रुकेगा! और ना ही आएगा!
आखिर भानगढ़ में ऐसा क्या है! जो आम जन को वह जाने से रोकता हैं!
अगर है तो उसके पीछे क्या कारण है! हालांकि वह भुक्ती हुई दुर्घटना का कारण आज तक कोई नहीं बता पाया!
लेकिन स्थानीय लोगों के बीच प्रचलित है कुछ कहानियां जो साबित करती है कि वह कुछ ना कुछ गड़बड़ तो ज़रूर है
लोगों का मानना है कि "बहुत समय पहले इस स्थान पर एक रतनावती नाम कि बहुत सुंदर राजकुमारी रहती थी! जिस पर काला जादू करने वाले तांत्रिक कि कु-दृष्टि थी! तांत्रिक ने अपने जादू से राजकुमारी को वस में करके उसका शारीरिक शोषण किया!
लेकिन एक दुर्घटना के चलते उस तांत्रिक की मृत्यु हो गई और आज भी उस तांत्रिक की आत्मा वहां भटकती रहती है!
तांत्रिक के श्राप के अनुसार वे स्थान कभी भी बच नहीं सका !
वहां रहने वाले लोगों की भी मृत्यु हो जाती है लेकिन उनकी आत्मा को मुक्ति नहीं मिलती है!
प्रचलित कहानी के अनुसार सिंधु सेवड़ा महल के पास दिग पहाड़ पर तांत्रिक क्रियाएं करता था वे रानी रतनावती के रूप पर आसक्त था! (यानी मरता था)
एक दिन भानगढ़ के बाजार में उसने देखा कि रानी की एक दासी रानी के लिए केश तेल लेने आई है!
सिंधु सेवड़ा ने उस तेल को अभिमंत्रित कर दिया! कि वह तेल जिस पर भी लगेगा उस वह तेल उसके पास ले आएगा! कहते हैं कि रानी ने जब तेल को देखा तो वे समझ गई कि ये तेल सिंधु सेवड़ा द्वारा अभीमंत्रित हैं
तो कहते हैं कि रानी बहुत सिद्ध थी इसलिए उसने पहचान करली और दासी से उस तेल को तुरंत फेंक देने को कहा!
दासी ने उस तेल को एक चट्टान पर गिरा दिया! कहते हैं कि अभिमंत्रित तेल ने चट्टान को उड़ाकर सिंधु सेवड़ा की ओर रवाना कर दिया!
सिंधु सेवड़ा ने चट्टान देखकर अनुमान लगाया कि रानी उस पर बैठकर उसके पास आ रही है!
सो उसने अभिमंत्रित तेल को रानी को सीधे अपनी छाती पर उतारने का आदेश दिया
जब चट्टान पास आई तब तांत्रिक को असलियत पता चली तो उसने आनन फानन में चट्टान उसके ऊपर गिरने से पहले भानगढ़ नगर उजड़ने का श्राप दे दिया!
और खुद चट्टान के नीचे दबकर मर गया!
कहते हैं, "सिद्ध रानी को यहां सब समझते देर ना लगी उसने तुरंत नगर खाली करने का आदेश दे दिया!"
इस तरह यहां नगर खाली होकर उजड़ गया और रानी भी तांत्रिक के श्राप की भेट चढ़ गई!
तो कितनी सच्चाई है इस कहानी में इसके बारे में इस बात से ही जाना जा सकता है !
कि जन श्रूतियो में भानगढ़ के लिए प्रचलित कहानी में कई लोग रत्नावती को राजकुमारी, तो कई लोग रानी बताते हैं!
रानी रत्नावती का जिक्र तो हर कोई करता है पर वे किस राजा कि रानी थीं! उसके राजा और उसका शासन काल कोनसा था,नगर किस काल में उजड़ा! इन प्रश्नों पर सभी चुप है
अक्सर लोग इस किले को 400 वर्ष उजड़ा हुआ बताते हैं! इसके बारे में यह कहा जाता है!
कि प्राचीन स्थानों में से यहां एक स्थान है जहां भूतों के होने की पूरी पूरी आशंका! या फिर जहां भूत विराज करते हैं वह भानगढ़ का ही किला है
इस Fort को या इस भानगढ़ के किले को लोग सबसे ज्यादा डरावना मानते हैं







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