बंदर और टोपी वाला:-




चलो आज एक ओर कहानी सुनते हैं! एक बार कि बात है ! एक गांव में एक व्यापारी रहता था! जो रोज़ बाज़ार जाकर अपनी टोपियां बेचा करता था!


बाज़ार का रास्ता जंगल की ओर से गुजरता था! एक बार गर्मी के समय व्यापारी अपनी टोपियां लेकर घार से बाज़ार की ओर निकल पड़ा! टोपियां रंग बिरंगी थी! जैसे लाल, पीली, हरी और नीली!


जाते जाते व्यापारी बड़ा थक गया! व्यापारी ने सोचा कि अब क्यों न थोड़ी देर आराम कर लिया जाए!


व्यापारी एक विशाल बड़गद के पेड़ के नीचे सौ गया! पेड़ पर बहुत सारे बंदर थे! व्यापारी को थोड़ी देर में बहुत तेज़ी से नींद लग गई!




बंदर पेड़ से उतर कर एक एक टोपियां लेगए! सब बंदर ने एक एक टोपी पैर ली! व्यापारी की कुछ देर बाद नींद खुली!


व्यापारी ने टोकरी में देखा तो एक भी टोपी नही थी! व्यापारी इधर उधर देखने लगा! व्यापारी को आखिर बंदर दिख गए!


फिर क्या, व्यापारी बंदर पर चिल्लाने लगा! उनसे कहने लगा कि उसकी टोपीया देदे! लेकिन बंदर तो बंदर होते है! वो क्यों दे टोपी!


व्यापारी बुरी तरह थक गया! व्यापारी सिर पर हाथ रखा बंदर ने ये देखकर उनने भी सिर पर हाथ रख लिया!


अब व्यापारी को समझ आ गया कि बंदर उसकी नकल कर रहे हैं! फ़िर व्यापारी ने थोड़ी देर सोचा और उसने अपनी टोपी निकाली और हिलाने लगा! 




बंदर भी उसे देखकर ऐसा करने लगे! फ़िर व्यापारी ने अपनी टोपी निकाली और जमीन पर फेक दी! 


फ़िर क्या, बंदर ने भी टोपी निकाल फैकी और व्यापारी ने फिर अपनी टोपी बिन ली! और अपनी टोकरी भर कर बाज़ार चला गया!


इस तरह व्यापारी ने बंदर से अपना पीछा छुड़ाया! और बाज़ार चला गया!  



                🇮🇳🇮🇳🇮🇳Jai Hind🇮🇳🇮🇳🇮🇳